A morning routine in a Cement Plant
प्रभाते क्लिंकर दर्शनम।
मेरे बहुत सारे दोस्त डीपीसी के साथ मेरे लव अफेयर्स को बहुत अच्छी तरह जानते हैं।
डीपीसी ही नहीं, बेल्ट कन्वेयर भी शामिल है उसमें।
मैं मेरे उन एक्सपेरिमेंट्स को फ्लाइंग अवर्स की कैटिगरी में डालता हूं।
लेकिन उन एडवेंचर्स की बातें फिर कभी होगी।
अभी मैं बात करूंगा की कैसे डीपीसी ने प्लांट ऑपरेशन का मेरा फंडा चेंज कर दिया।
जब मुझे पता चला कि एक नॉन टेक्निकल सुपरवाइजर मेरे चेरमैन को रोज डीपीसी के क्लिंकर का वीडियो चुप चुप कर भेजता है, तो मैं पहले वाले प्लांट हेड की तरह चीड नहीं गया।
मैंने खुद ही डीपीसी में जाते हुऎ क्लिंकर का वीडियो भेजना शुरू किया।
और अनजाने में ही एक अलग प्रोसेस शुरू हो गयी।
एक दो दिन बाद मुझे एहसास हुआ कि जो वीडियो में भेज रहा हूं वह बहुत गंदा सा एरिया है, तो मैंने उसे साफ करवाया।
फिर एक बार में जब वीडियो बना रहा था तब क्लिंकर बहुत खराब आ रहा था, मैं तब रुक गया और जब अच्छा क्लिंकर जा रहा था तब वीडियो बनाकर भेजा। अब मैंने सोचा कि यह तो गलत है भाई। मैंने सीसीआर को बोल दिया की देखो भाई, 8:30 बजे जब मैं मॉर्निंग मीटिंग के बाद डीपीसी पर जाऊंगा तो मुझे अच्छा क्लिंकर चाहिए।
उन्होंने वह करना शुरू कर दिया। जब प्रेयर के बाद में डीपीसी पे जाता तो मुझे सही क्लिंकर ही मिलता।
तब मैंने उनको यह सवाल किया कि जब आप उस टाइम पर सही क्लिंकर बना सकते हो तो 24 घंटे अच्छा क्लिंकर भी बना सकते हो न?
तब उन्होंने जो बताया उसमें मेरे मेरे लिए बहुत सारे सवाल थे।
और मैं उन सवालों के जवाब ढूंढने लगा।
इस प्रक्रिया में प्लांट का परफॉर्मेंस सुधरता गया, बढ़ता गया।
और यह नियम आज भी फॉलो हो रहा है।
Read here in English

Great! Wonderful observation and corrections.
ReplyDeleteThat's called Genchi Genbutsu Gemba walk.
Prepare, Observe/Watch the processes, Engage and Follow Up.
Thank you, dear Sir.
DeleteYour inputs are precious.
Thanks again.